पीछोला क्रूज़ संचालन में मुखर विरोध में कांग्रेस,भाजपा ने बोर्ड मीटिंग में दी गलत जानकारी !
आज उदयपुर नगर निगम बोर्ड मीटिंग में क्रूज़ को लेकर जबरदस्त बहस देखी गई । जहां कांग्रेस के पार्षद श्री अरुण द्वारा क्रूज़ संचालन को लेकर झीलों के जलीय तंत्र के बर्बाद होने की बात कही गई और यह भी कहा गया कि जहां एक और होटल वालों को जो झील के किनारे संचालित हो रहे हैं,उन्हें हम पाबंद कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर झील में डीजल संचालित क्रूज़ को झील में उतार रहे हैं।अरुण टाँक ने न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम की न्यूज़ का हवाला देते हुए कहां कि जहाँ तक क्रूज़ का सवाल है तो ये केवल सागर या उससे जुडी नदियों में चलाये जा सकते है।
जब इस बारे में गैराज समिति अध्यक्ष श्री मनोहर सिंह जी से इसका जवाब पूछा गया तो उन्होंने आधार हीन बातें कर क्रूज़ के पक्ष में ऐसे बयान दिए जो तकनीकी तौर पर भ्रामक थे। उन्होंने कहा कि जहाँ तक क्रूज़ के टेण्डर की शर्तों के डीज़ल इंजिन का सवाल है तो क्रूज़ का डीज़ल इंजन पूरी तरह पैक होगा जिससे एक बूंद भी डीज़ल इंजन से बाहर पानी मे नही गिरेगा।( आप ही सोचिये भला ऐसा हो सकता है कि डीजल पानी मे न गिरे )
दूसरा उन्होंने बताया कि क्रूज़ में खाना नहीं बनाया जायेगा और खाना बाहर से आएगा। समझ से परे है कि क्रूज़ में रेस्टॉरेंट चलेगा और खाना बाहर बनेगा ? धुँए के लिए चिमनी की ऊँचाई 50 फ़ीट है जिससे धुंआ ऊपर चला जाएगा। कोई इनसे पूछें कि धुंआ जाएगा तो ऊपर ही ,लेकिन रहेगा तो पीछोला झील की आबोहवा में ही जहाँ सुबह शाम लाखों पक्षी उड़ते रहते है ।
तीसरी भ्रामक बात ये गैराज समिति अध्यक्ष श्री मनोहर सिंह ने कहा कि क्रूज़ ज्यादा चलेगा नहीं और बमुश्किल 500 मीटर के दायरे में चल कर एक जगह खड़ा हो जाएगा।
इसके बाद कांग्रेस के पार्षद श्री अरुण द्वारा क्रूज़ ने यह भी कहा कि कुछ रुपयों के राजस्व के लिए झील को बर्बाद होने से बचाया जाय और क्रूज़ टेंडर में अपशिस्ट निस्तारण के साथ अन्य सर्टिफिकेट जैसे इंटरनेशनल लोड लाइन सर्टिफिकेट आदि का उल्लेख नहीं होने की बात भी कही गयी। तो इस पर गैराज समिति अध्यक्ष श्री मनोहर सिंह ने कहां कि सभी तरह के सर्टिफिकेट आदि का उल्लेख टेण्डर डॉक्यूमेंट में है और आपके पास गलत जानकारी है। आप इसे गैराज से प्राप्त कर लेना।
इस पर शहर विधायक गुलाब चंद कटारिया बोले कि क्रूज़ का विषय विवादित है और इसमें तकनीकी तोर पर जाँचने की जरुरत है,समझने की जरुरत है कि लोगों का विरोध क्यों है ?इसको समझने का प्रयत्न करे और इसमें ज्यादा जल्दी न करे। अगर ये जगह उपयुक्त नहीं है तो कहाँ इसे लगाया जा सकता है इस पर सोचने की जरुरत है।
इसके बाद उपमहापौर बोले कि हमारे पास क्रूज़ संचालन के जो पेपर है उसे हम सभी पार्षदों को उपलब्ध करवा देंगे। इसमें जो 150 सीटर रेस्टॉरेंट है उसमे लंच डिनर नाश्ता संचालन के बारे में पूरा एक एक बात का ज़िक्र है। अगर क्रूज़ संचालन से झीलों का पानी खराब होता है तो जाँच कर इसे बंद करवा देंगे।
तभी कांग्रेस के पार्षद अरुण टांक बोले कि ये झील से जुड़ा मुद्दा है और झील उदयपुर की जान है। क्रूज़ निर्माण को लेकर अभी रोक लगाने के बारे मे सोचना चाहिए तो उपमहापौर ने जवाब दिया कि अभी क्रूज़ पीछोला में उतरने में पांच महीने का समय शेष है और अगर खामी होगी तो टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा।
यहाँ क्रूज़ को लेकर उपमहापौर और गैराज समिति अध्यक्ष दो बाते विरोधाभासी बोल रहे है :
- जहाँ गैराज समिति अध्यक्ष बोर्ड मीटिंग में बोल रहे थे कि क्रूज़ में खाना नहीं बनाया जायेगा और खाना बाहर से आएगा। वही उपमहापौर पारस सिंघवी ने कहा कि टेंडर डॉक्यूमेंट में 150 सीटर रेस्टॉरेंट है जिसमे लंच डिनर नाश्ता संचालन के बारे में पूरी एक एक बात का ज़िक्र है। मतलब साफ़ है कि गैराज समिति अध्यक्ष सदन सहित उदयपुर की जनता को गुमराह कर रहे कि क्रूज़ में खाना बाहर से बन कर आएगा। भला ऐसा किसी क्रूज़ में होता है क्या ?
- जब सेफ्टी सर्टिफिकेट जैसे इंटरनेशनल लोड लाइन सर्टिफिकेट,इंटरनेशनल आयल पोलुशन प्रिवेंशन सर्टिफिकेट ,सेफ्टी कंस्ट्रक्शन सर्टिफिकेट आदि का ज़िक्र टेंडर डाक्यूमेंट्स में नहीं होने की बात कांग्रेस के पार्षद श्री अरुण टांक ने कही तो गैराज समिति अध्यक्ष और उनके साथियो ने एक सुर में इसके टेंडर डॉक्यूमेंट में होने की बात कही गयी जो पूरी तरह गुमराह करने वाली जानकारी है। न्यूज़एजेंसीइंडियाडॉटकॉम के पास पूरी जानकारी के साथ प्रमाण है कि क्रूज़ टेंडर में किसी इंटरनेशनल लोड लाइन सर्टिफिकेट,इंटरनेशनल आयल पोलुशन प्रिवेंशन सर्टिफिकेट ,सेफ्टी इक्विपमेंट्स,सेफ्टी रेडियो सर्टिफिकेट और सेफ्टी मैनेजमेंट सर्टिफिकेट,सेफ्टी कंस्ट्रक्शन सर्टिफिकेट आदि का ज़िक्र है ही नहीं !
- ये तथ्य भी सर्वविदित है कि नगर निगम उदयपुर ने क्रूज संचालन हेतु नेशनल मेरीटाइम बोर्ड से भी कोई गाइड लाइन नहीं ली।
- क्रूज संचालन करने के लिए नेशनल मेरीटाइम फाउंडेशन के अनुसार शिपिंग मिनिस्ट्री से पहले कोई अनुमति नहीं ली गयी।
- नगर निगम उदयपुर को ये भी जानना जरुरी था कि क्या छोटी झीलों में इस तरह के व्यावसायिक क्रूज उतारे जा सकते है ? क्योंकि इस तरह के क्रूज़ केवल समुद्र से लगती बड़ी नदियों ,झीलों और समुद्र पोर्ट से संचालित किये जाते है।
- क्रूज निर्माण हेतु कोई सुरक्षा गाइड लाइन्स टेंडर में जारी नहीं की गयी और न ही कोई निर्माण गाइड लाइन्स ! भारत में अभी क्रूज़ विदेशो से बनकर आते है ऐसे में उदयपुर में ही पीछोला झील किनारे क्रूज़ यही के लोकल इंजीनियर और मजदुर बना रहे है।