कोरोना का खतरनाक डेल्टा प्लस वैरिएंट भारत में आया,वैक्सीन और एंटीबॉडी भी बेअसर है इसके सामने !
भारत में पहले कोरोना वायरस फिर उसके डेल्टा वैरिएंट और अब डेल्टा प्लस वैरिएंट पैर पसारना शुरू कर दिया है। कोरोना के मामले भले ही कम होने लगे हों, लेकिन इस वायरस का बदलता रूप अब डरावना होता जा रहा है। इस बात के साक्ष्य हैं कि कोरोना की दूसरी लहर का कारण कोरोना का डेल्टा वैरिएंट (B.1.617.2) प्रमुख था। अब इस बात की भी चिंता बढ़ गई है कि वैरिएंट के नए म्यूटेशन डेल्टा प्लस या AY.01 तेजी से बढ़ रहा है। जानकारों ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि डेल्टा+ वैरिएंट वैक्सीन और इंफेक्शन इम्यूनिटी को भी चकमा दे सकता है। फिलहाल महाराष्ट्र और केरल में कोविड-19 के डेल्टा प्लस वैरिएंट के कुछ केस सामने आये हैं। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के अनुसार राज्य में डेल्टा वैरिएंट के 21 मामले सामने आए हैं।
वहीं खबर है कि मध्य प्रदेश के शिवपुरी में भी डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले सामने आ चुके हैं। चार लोगों में डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई थी और चारों लोगों की मौत हो गई है। इन लोगों के सैंपल को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे जाने के बाद डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि हुई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिन चार लोगों में इस वायरस की पुष्टि हुई है उनकी मौत भी हो गई है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इन चारों को लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन भी लग चुकी थी।
बता दें कि डेल्टा प्लस को कोरोना वायरस का सबसे खतरनाक वैरिएंट माना जा रहा है। कोरोना वायरस के अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा, अभी तक ये चार वैरिएंट सामने आए हैं। खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन इन चार वैरिएंट के बारे में जानकारी दे चुका है। इसमें सबसे खतरनाक डेल्टा वैरिएंट जो भारत में भी पाया गया है। कोरोना वायरस की दूसरी लगर में डेल्टा वैरिएंट ने ही कहर बरपाया था ।
वहीं, दूसरी ओर से केरल में भी डेल्टा प्लस कम से कम तीन मामला सामने आए हैं। केरल के पलक्कड़ और पठानमथिट्टा जिलों से एकत्र किए गए नमूनों में डेल्टा-प्लस वैरिएंट के कम से कम तीन मामले पाए गए हैं।
भारत के प्रमुख वायरोलॉजिस्ट और INSACOG के पूर्व सदस्य प्रोफेसर शाहीद जमील ने कहा कि इस बात का अंदेशा है कि डेल्टा प्लस वैरिएंट इम्यूनिटी और वैक्सीन के साथ-साथ पहले के इन्फेक्शन से विकसित इम्युनिटी को भी धोखा दे सकता है। प्रोफेसर जमील ने कहा कि ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि डेल्टा प्लस में वो सारे लक्षण हैं जो ओरिजिनल डेल्टा वैरिएंट में थे लेकिन इसके अलावा K417N नाम का म्यूटेशन जो दक्षिण अफ्रीका में बीटा वैरिएंट में पाया गया था उससे भी इसके लक्षण मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि हमें यह अच्छे से पता है कि वैक्सीन का असर बीटा वैरिएंट पर कम है। बीटा वैरिएंट वैक्सीन को चकमा देने में अल्फा और डेल्टा वैरिएंट से भी ज्यादा तेज है। यह तथ्य भी है कि दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की खेप वापस कर दी थी उनका कहना था कि यह वैक्सीन वहां वायरस के वैरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं थी।
हालांकि प्रोफेसर जमील ने कहा कि अभी इस बात के साक्ष्य नहीं मिले हैं कि डेल्टा प्लस और ज्यादा संक्रामक है। उन्होंने कहा कि हमारे पास शायद ही डेल्टा प्लस वैरिएंट वाले मामले हैं जिससे कि हमें भारत की आबादी के संबंध में इस वैरिएंट को लेकर चिंता हो। 25000 सिक्वेंसेज किए गए हैं जिसमें से 20 मामले आए हैं जो की कुछ भी नहीं है और ज्यादा सिक्वेंसिंग से पता चल पाएगा कि यह कितना है ?
यह मानने का कारण है कि डेल्टा+ एंटीबॉडी और वैक्सीन प्रतिरक्षा दोनों के साथ-साथ उन उपचारों के लिए प्रतिरोधी हो सकता है जो कोविड को गंभीर होने से रोकते हैं। जैसे कि रोश और सिप्ला द्वारा भारत में उपलब्ध कराए गए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार जिसके प्रारंभिक परिणामों काफी अच्छे थे.
वायरोलॉजिस्ट प्रोफेसर शाहिद जमील ने कहा है कि डेल्टा प्लस वैरिएंट वैक्सीन लेने से शरीर में बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेअसर कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं और आपमें एंटीबॉडी बना है, वो भी इस नए वैरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं रह सकता।
यानी प्रोफेसर जमील स्पष्ट रूप कहते हैं कि अगर आपने वैक्सीन ले ली है और आपमें नेचुरल तरीके से एंटीबॉडी भी बन गया है तो भी आप इस नए वैरिएंट को लेकर सुरक्षित नहीं हैं।
हालांकि बीते सप्ताह ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस स्वरूप अभी तक चिंताजनक नहीं है और देश में इसकी मौजूदगी का पता लगाना होगा और उस पर नजर रखनी होगी। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने कहा था कि डेल्टा प्लस नामक वायरस का नया स्वरूप सामने आया है और यह यूरोप में मार्च महीने से है। कुछ दिन पहले ही इसके बारे में जानकारी सार्वजनिक हुई थी ।
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