कोरोना वायरस का भारत में प्रसार, क्या है स्थिति और चीन का हुआ क्या हाल !
यद्यपि कोरोना से पैनिक होने की जरूरत नही लेकिन कुछ अनुभवी इसे tb और फ्लू जैसा वायरस मान रहे । सनद रहे ये #Corona है जिसने चीन को बर्बाद कर दिया। विस्तृत ज्ञान, तकनीक ,संसाधन होने के बाद भी कई बेहतरीन डॉक्टर्स को चीन ने इस वायरस के कारण खो दिया। कुल मिला कर हालात सही नही है।
भारत सरकार अभी उतनी जागरूक नही दिख रही जितनी होनी चाहिये।
पर्यटकों की कई भारतीय हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग नही की जा रही है। पीड़ितों को पुलिस प्रोटेक्शन में नही रखा जा रहा। रेलवे स्टेशन के साथ बस अड्डों पर भी स्क्रीनिंग नही की जा रही है। होटल वालों को प्रतिदिन पर्यटकों की स्वास्थ्य जाँच रिपोर्ट सौपने या ईमेल करने की अनिवार्यता नहीं करी गयी है।
याद रखिये चीन ने भी शुरुआती दिनों में इसे उतने जोखिम के रूप में नहीं देखा था जितना उसने कोरोना प्रसार के एक महीने बाद इसे चीन में लोगों को मरते देखा।
चीन के पास इतने सारे संसाधन होने के बावजूद उसे लोगों को उनके घरों में ,फ्लैट्स में और कॉलोनियों में लॉक डाउन करना पड़ा। उसके पास इतने संसाधन थे कि बेहतरीन अस्पताल उसने 9 दिन में ही खड़ा कर लिया लेकिन कोरोना जितना सीधा नाम है उतना ही भयावह ये है भी।
चीन में फिलहाल अब तक आधिकारिक तौर पर 3500 से ज्यादा लोगों की जान कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जा चुकी है और अपुष्ट सूत्र इनकी संख्या 1 लाख लोगों तक बता रहे है। ये तो चीन है जो लोगों को सड़क से उठा कर रोग की जाँच औऱ स्क्रीन कर सकता है और परिवार के बीच से संक्रमित आदमी को जबरदस्ती ले जा सकता है। ध्यान रहे चीन के पास इतने संसाधन होने के बावजूद भी उसने अब तक कोरोना मामले में मुँह की ही खाई है ।
जहाँ तक वायरस के प्रति गम्भीर होने की बात है तो चीन जैसी गलती भारत भी कर रहा है और ऐसी ही गलती ईरान और इटली भी कर चुका है। अगर वायरस में विलक्षण म्यूटेशन नही होता तो इतने कम समय मे ये वायरस पूरी दुनिया मे इतनी जल्दी नही फैलता।
भले ही चीन में ही इस वायरस को तैयार किया गया हो लेकिन उसके पास अब तक इसका एन्टी डॉट नहीं है नही तो वो अपने लोगों को मरने नही देता। भारत भर में कुछ ही दिनों में संक्रमित कोरोना रोगियों की संख्या 34 हो गयी है और रोज लगभग 4 से 8 नए संक्रमण के केस आ रहे है। ध्यान रहे कि वायरस रोज अपने पैटर्न चेंज करता जा रहा है इसका मतलब ये हुआ कि अलग अलग इंसान के एक ही कोरोना वायरस के अलग अलग लक्षण समय के साथ बदलते जा रहे है। फिलहाल मेडिकल दुनिया के पास इसका कोई बेहतर इलाज नहीं है और एड्स जैसी वायरस जनित बीमारी की दवाइयों के साथ अन्य जीवन रक्षक दवाइयों के प्रयोग से लोगों को बचाने का प्रयोग किया जा रहा है जिसमे से दस में से केवल 6 लोग ही बच पा रहे है। मतलब साफ है कि कोई भी देश और सरकार चाहे कितना भी छुपा ले लेकिन वायरस संक्रमण से मौत रुक नही पा रही है और मरीज दम घुट कर जानवर की मौत मर रहा है।