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clean-udaipur फतहसागर पर बिना अनुमति चार मंज़िला अवैध निर्माण,निगम जान बूझ कर बना अनजान !
News Agency India November 02, 2019 04:31 AM IST

फतहसागर पर बिना अनुमति चार मंज़िला अवैध निर्माण,निगम जान बूझ कर बना अनजान !

उदयपुर शहर में झील किनारे कई ऐसे मकान है जिनके परिवार बढ़ गए है और उन्हें कहीं न कहीं अपने वर्तमान मकान को बड़ा करने की जरुरत है या नयी मंजिल बनाने की जरुरत है लेकिन ऐसे मकान मालिकों के आवेदन उदयपुर नगर निगम के अधिकारी नियमों का हवाला देकर सिरे से ख़ारिज कर देते है वहीं अगर आप रसूखदार है ,मोटी जेब वाले है तो आपको कही चिन्ता करने की जरुरत नहीं है और आप चाहे तो बिना अनुमति झील किनारे मकान भी बना सकते है।

ऐसा ही एक वाक्या 64,विध्या मार्ग देवाली का है जिसमे कोई प्रदीप जैन नाम की पार्टी अवैध रूप से चार मंजिला इमारत बना रही है। आपको बताते चले कि पहले इसी प्लाट पर स्मार्ट सिटी वालों की तरफ से फतहसागर घूमने के लिए साईकल किराये देने वाली कम्पनी का बड़ा सा कंटेनर रुपी ऑफिस रखा था जिसकी आड़ में चार मंजिला इमारत खड़ी कर दी गयी।

आपको बताते चले कि नगर निंगम के अधिकारी इस जगह को निर्माण निषिद्ध क्षेत्र मानने से कतरा रहे है जबकि UIT उदयपुर की साइट पर उपलब्ध मैप में ये एरिया साफ़ तौर पर निर्माण निषिद्ध क्षेत्र जोन 1 में आता है जिसके अनुसार अत्यन्त आवश्यक कारणों पर अधिकतम केवल 40 प्रतिशत क्षेत्र पर ही निर्माण किया जा सकता है। लेकिन जब आप मौके पर जाकर देखेंगे तो पूरे प्लाट पर ही चार मंज़िला इमारत खड़ी कर दी गयी है। यहाँ ये बात महत्वपूर्ण है कि इस प्लाट से फतहसागर किनारे की दुरी 200 मीटर भी नहीं है।

जब न्यूज़एजेंसीइंडिया के संवाददाता ने कथित निर्माण को लेकर मौके पर उपस्थित सुपरवाइज़र राहुल से बात की तो उन्होंने बताया कि उनके पास निर्माण की स्वीकृति है लेकिन राहुल वो स्वीकृति हमारी टीम को दिखा नहीं पाए। जब न्यूज़एजेंसीइंडिया की टीम ने निगम में अपने सूत्रों से पता किया तो पता चला कि उक्त प्लाट के एड्रेस या प्रदीप जैन के नाम से कोई स्वीकृति की फाइल उनके पास आज तक नहीं आयी है।

लेकिन भवन अनुमति देने वाले एक बड़े अफसर ने बचाव करते हुए कहा कि उक्त क्षेत्र निर्माण निषिद्ध क्षेत्र में नहीं आता है जबकि पास वाले प्लाट वाले लोग कह रहे कि साहब ये लोग झूठ बोल रहे है क्योंकि हमारे घरों में तो ये लोग सीढ़ी बनाने तक को मना कर देते है लेकिन इनके पास चार मंज़िला निर्माण की स्वीकृति कैसे आयी,ये बात गले उतर नहीं रही है।

यहाँ ये बात ध्यान देने वाली है कि क्यों उदयपुर नगर निगम के अधिकारी निर्माण निषिद्ध क्षेत्र के सीमांकन को गलत बता कर अभी तक कार्यवाही से बच रहे है ? उक्त प्लाट पर क्या चार मंजिला भवन निर्माण की अनुमति है और अगर है तो किन नियमो के तहत फतहसागर किनारे चार मंज़िला इमारत बनाने की स्वीकृति जारी की गयी ? और अगर स्वीकृति जारी नहीं की गयी तो ऐसा क्या कारण है कि नगर निगम के भवन अनुमति और राजस्व विभाग अधिकारी कार्यवाही करने से चूक रहे है ?क्यों उदयपुर शहर की झीलों के आसपास अवैध निर्माण होते चले जा रहे है ? क्या नगर निगम सहित अन्य विभागों के लोगों को ये अवैध निर्माण दिखते नहीं है या कोई और कारण है जो जीती जागती आँखों पर पट्टी लगा देता है ?

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