पोस्टल आर्डर पर नाम नहीं होने के बहाने CMHO उदयपुर कार्यालय ने जानबूझ कर RTI में नहीं दी सूचना
उदयपुर में सूचना के अधिकार कानून का मखौल बनाने में विभागों में एक प्रकार की हौडा-होड़ी मची पड़ी है और RTI जैसे गंभीर कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है।
इसी क्रम में उदयपुर के CMHO कार्यालय में सूचना के अधिकार कानून के तहत उदयपुर के आवेदक सिविल इंजीनियर जयवन्त भैरविया ने आवेदन किया । आवेदन के साथ सम्पूर्ण विवरण लिखा गया था लेकिन आवेदन के साथ संलग्न पोस्टल ऑर्डर पर विवरण नही लिखा गया था। इस पर पत्र भेज कर CMHO कार्यालय ने सूचना देने से मना कर दिया।
आवेदक ने दुबारा पत्र भेज कर पोस्टल ऑर्डर वापस लौटाने की माँग भी की लेकिन कई दिनों बाद पिछले पत्र की फ़ोटो कॉपी भेज दी लेकिन पोस्टल आर्डर नही भेजा गया। आश्चर्य की बात यह कि दो बार विभाग ने डाक से भेजे गए लिफाफे पर स्वयं का व आवेदक का नाम लिखा लेकिन पोस्टल आर्डर पर नही लिख पाया।
ऐसा नही है कि वहाँ कार्मिकों की कमी है, अपितु सूचना के प्रकटन से अनियमिताओं और भ्रस्टाचारों के उजागर होने की संभावना के चलते किसी न किसी बहाने का होना जरूरी था, इसलिए बचाव का ये रास्ता निकाला गया।
यहाँ ये भी देखने लायक है कि 10 रुपये के पोस्टल आर्डर के लिये विभाग ने 44 रुपये डाक शुल्क पर खर्च कर दिये,जिसकी वजह से राजकीय कोष की बर्बादी भी की गई।
क्या मांगी थी सूचना
(1) दिनाँक 1 जनवरी 2019 से दिनाँक 15 मार्च 2021 तक खादी ग्राम उद्योग भंडार से वित्तीय वर्षों में कुल खरीद विवरण
(2) ग्रामोद्योग विकास समिति से दिनाँक दिनाँक 1 जनवरी 2019 से दिनाँक 15 मार्च 2021 तक की गई कुल खरीद का विवरण
(3) अन्य स्वयं सेवी ,स्व पोषित या राजस्थान सरकार, भारत सरकार से अधिकृत संस्था से विभिन्न उपकरण, दवाइयां, कनज्युमेबल एवम अन्य किसी भी प्रकार की सामग्री दिनाँक 1 जनवरी 2019 से 15 मार्च 2021 तक की खरीद विवरण
राज्य सूचना आयोग ने इस प्रकार के प्रकरणों में आवेदक के पक्ष में दिये है महत्वपूर्ण निर्णय
आवेदक ने बताया कि सूचना आयोग ने अपील संख्या 1840/2008 के निर्णय में कहा है कि PO खाली हो तो उसे लौटना या उस पर कार्यवाही से इंकार करना गंभीर त्रुटि है।
यह है नजीर
राजस्थान सूचना आयोग ने जयपुर निवासी मदनलाल गुप्ता बनाम उप आवासन आयुक्त ( वृत प्रथम ) जयपुर की सुनवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त एम. डी. कोरानी ने निर्णय में कहा कि लोक सूचना अधिकारी के लिये यह पूर्ण सुविधा थी कि वे नाम अंकन अपने स्तर पर कर लेते, इस PO का नंबर उनके आवेदन पर भी अंकित थे जिससे किसी भी प्रकार की त्रुटि होने की आशंका भी नहीं थी।
*आवेदन ने की राज्य सूचना आयोग को शिकायत* आवेदक ने माननीय राज्य सूचना आयोग द्वारा अपील संख्या 106276/2019 प्रतापसिंह शेखावत बनाम ग्राम सेवक ग्राम पंचायत बीनादेसर , दिनाँक 13/11/19 के निर्णय में पोस्टल ऑर्डर पर विवरण अंकित न होने से सूचना न देने आदि कारणों पर लोक सूचना अधिकारी पर लगाए 25 हजार की पेनाल्टी का हवाला देते हुए जुर्माना लगा सूचना प्रदान करने हेतु शिकायत कर दी है।
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