एक तरफ कांग्रेस और भाजपा के विधायकों की बाड़ेबंदी,दूसरी और मुख्यमंत्री गहलोत ने लिखा पत्र सभी MLA को !
राजस्थान में राजनीतिक और सियासी उठापटक के बाद कांग्रेस और भाजपा के विधायकों की बाड़ेबंदी का दौर जारी है। कई कांग्रेसी MLA जहाँ जैसलमेर में है तो वहीं राजस्थान के भाजपा के MLA गुजरात के पोरबंदर और सोमनाथ में राजनीतिक पर्यटन पर गए हुए है।
इसी बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने सभी एमएलए को लेटर लिखा है।
लेटर में लिखा है कि -"मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता एवं संतोष का अनुभव हो रहा है कि दिसंबर 2018 में कांग्रेस सरकार के चुने जाने के साथ ही पिछले डेढ़ साल में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास एवं अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का हर संभव प्रयास किया है।
सरकार ने संवेदनशील पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन देते हुए शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, पानी, सड़क एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ पंचायत समिति उपखंड स्तर पर फैसले किए जिनकी सर्वत्र प्रशंसा हुई।
कोरोना जैसी विश्वव्यापी महामारी के कारण अचानक स्थिति विकट हो गई कोरोना की भयावहता और इसकी गंभीरता को समझते हुए हमने सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों, चिकित्सकों ,धर्मगुरुओ ,स्वयंसेवी संस्थाओं,सामाजिक कार्यकर्ताओं ,उद्यमियों, भामाशाहो ,पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों, पुलिस प्रशासन, राज्य कर्मचारियों एवं आमजन को साथ लेकर शानदार प्रबंधन किया, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई।
कोरोना के खिलाफ हम सब मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए हमने प्रदेश में सभी विधायकों एवं सांसदों के साथ 21 घंटे की वीडियो कॉन्फ्रेंस की। जिसमें विचारों और सुझावों का आदान-प्रदान हुआ। सभी जनप्रतिनिधियों के सुझावों को सम्मान करते हुए हमने उनके आधार पर कई फैसले भी किये है।
आपके सहयोग से ही हम प्रदेश में कोरोना को तेज गति से आगे बढ़ने में रोकने में काफी हद तक सफल हुए हैं। कोरोना महामारी इतना भयंकर रूप ले चुकी है कि यह किस रूप में जाकर रुकेगी और किस परिवार को इस का कहर झेलना पड़ेगा ,इसके बारे में कुछ भी कहना बहुत मुश्किल है। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार आप सभी साथियों से मिलकर कोरोना से निपटने का प्रयास कर रही है।
राजस्थान में भी कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी है। वैश्विक स्तर पर स्थापित मापदंडों के अनुसार अधिकतम जांच करके ही इस महामारी पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। राज्य में कोरोना संक्रमण के प्रारंभ में हमारे यहां इस वायरस की जांच की सुविधा नहीं थी। हमने अथक प्रयास कर कुछ ही महीनों में 40000 प्रतिदिन से अधिक जांच करने की क्षमता राज्य में विकसित की। इसी का परिणाम रहा कि हमने राज्य में संक्रमित क्षेत्रों को तुरंत चिन्हित कर रुथलेस कंटेंटमेंट किया। यह संतोष का विषय है कि हमारे सम्मिलित प्रयासों से राजस्थान में अन्य राज्यों की तुलना में रिकवरी रेट अधिक और मृत्यु दर कम रही है फिर भी हम सभी को सतर्क रहना आवश्यक है।
कोरोना के कारण जो हालात बने हैं वह हम सबके लिए चिंता होनी चाहिए कि कैसे इसका मुकाबला करें ? कैसे लोगों का जीवन बचाया जाए और कैसे उद्योग धंधे फिर से शुरू हो सके ? कैसे बेरोजगार लोगों को रोजगार मिल सके राज्य सरकार इस दिशा में दिन-रात लगी हुई है।
ऐसी परिस्थितियों में भी हमारे कुछ साथी और विपक्ष के कतिपय नेता मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई हमारी सरकार को अस्थिर करने के षड्यंत्र में लगे हुए हैं यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह सर्वविदित है कि पहले भी 1993-96 के दरमियान विधायकों की खरीद-फरोख्त पर श्री भैरों सिंह जी शेखावत की सरकार को गिराने के प्रयास किए गए थे। उस समय मैंने केंद्रीय राज्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नाते तत्कालीन राज्यपाल श्री बलिराम भगत एवं प्रधान मंत्री श्री पी वी नरसिम्हा राव से मिलकर व्यक्तिगत विरोध किया की चुनी हुई सरकार को गिराना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है और मैं इसे राजनीतिक महा पाप की श्रेणी में मानता हूं। यहां के प्रदेश वासी कभी नहीं चाहेंगे कि राजस्थान में ऐसी परंपरा स्थापित हो। वर्तमान में पूरे प्रदेश वासियों में इस घटनाक्रम को लेकर इस षड्यंत्र में शामिल जनप्रतिनिधियों के प्रति भयंकर आक्रोश है।
श्री राजीव गांधी जी के समय 1984 में दल बदल विरोधी कानून लाया गया तथा बाद में श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की सरकार के समय यह प्रावधान किया गया कि किसी भी राजनीतिक दल के कम से कम दो तिहाई चुने हुए सदस्यों द्वारा नया दल बनाया जा सकता है अथवा दूसरे दल में विलय हो सकता है। राजस्थान के छह बसपा विधायकों ने इस कानून के दायरे में रहकर राज्य में स्थिर सरकार एवं अपने अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों में सुविधा के लिए कांग्रेस विधायक दल में विलय का निर्णय किया जो की विधि सम्मत है ,परंतु तोड़फोड़ एवं खरीद फरोख्त करके सरकार को अस्थिर करना किसी भी दृष्टि से न्याय उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह स्वस्थ लोकतांत्रिक मर्यादा और परंपराओं के विरुद्ध है।
चुनाव में हार जीत होती रहती है। जनता का फैसला हमेशा शिरोधार्य रहा है। यही हमारी परंपरा रही है। इंदिरा जी ,राजीव जी, अटल जी जैसे नेता भी चुनाव हारे हैं ,लेकिन उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं एवं संवैधानिक मूल्यों को कभी कमजोर नहीं होने दिया।जनता से चुनकर जो नुमाइंदे आते हैं चाहे वह किसी भी पार्टी या गुट के क्यों ना हो, हम सब उनका सम्मान करते हैं, उनके क्षेत्र के हर जायज मांग को बिना भेदभाव को पूरा करने का प्रयास करते हैं। प्रदेश में सभी क्षेत्रों का क्रमिक विकास ही हमारा लक्ष्य है।
मेरी आप सभी से अपील है कि लोकतंत्र को बचाने हमें जनता का विश्वास बरकरार रखने एवं गलत परंपराओं से बचने के लिए आपको जनता की आवाज सुननी चाहिए। आप चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी के विधायक हो ,आप अपने अन्य साथियों परिवारजनों और अपने क्षेत्र के मतदाताओं की भावनाओं को समझ कर यह सुनिश्चित करने का फैसला करें कि किस प्रकार राजस्थान प्रदेश के हितों के लिए जनता द्वारा चुनी हुई बहुमत प्राप्त सरकार मजबूती के साथ कार्य करती रहे और सरकार को अस्थिर करने के मंसूबे कामयाब नहीं हो सके।
मुझे विश्वास है कि प्रदेशवासियों के व्यापक हित में आप सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे और राज्य के विकास और समृद्धि के लिए जनता से किए गए वायदों को पूरा करने में अपना सहयोग करेंगे। "
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