पर्यटक मवेशी संग सेल्फी पोस्ट कर बदनाम कर रहे उदयपुर शहर को दुनिया में !
आवारा मवेशी आपको उदयपुर के हर गली मोहल्लों में विचरण करते दिख जाएँगे। भाई उदयपुर शहर पर मवेशियों का भी तो अधिकार है। यदा कदा ये आपकी शक्ल पसन्द न आने पर अपनी नाराजगी आपको शारीरिक नुकसान पहुँचा कर जताते भी है। पिछले एक वर्ष में 2 विदेशी पर्यटक सांडों की लड़ाई में घायल भी हो गए। सामान्य उदयपुर वासी को तो रोजाना ये अपना आशीर्वाद देते रहते है।
शहर के कुछ लोगों ने बीच शहर में दूध डेरियां के घरों में गायों को पाल रखा है और दूध निकाल कर वे इन्हे शहर में चरने छोड़ देते है। आवारा मवेशी पूरे दिन और कई तो रात को भी सड़को पर बैठे रहते है। कुछ तो इतने आत्मविश्वासी होते है जो बीच सड़क पर बैठ जाते है और रात के अँधेरे में दुपहिया सवार इन्हे देख नहीं पाते और दुर्घटना का शिकार हो जाते है।
नगर निगम उदयपुर (जो एक स्मार्ट सिटी भी है) आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान महीने में इक्के दुक्के बार चलाती है और पकडे गए पशुओं को छोड़ने के लिए नेता नगरी दवाब बनाने लगती है। साथ ही निगम ने अभी तक न तो शहर के पशु पालको को और न हीं डेरी वालों को चिन्हित किया है। पशुओं पर टैग लगाने की जानकारी तो नगर निगम के लिए दूर की कौड़ी है।
ये आवारा मवेशी शहर भर को अपने मल मूत्र से गन्दा करते है और स्वच्छ भारत अभियान को चलाने के लिए नगर निगम उदयपुर को काम उपलब्ध करवाते है। पर्यटकों को मवेशी सड़क पर दिखने पर आश्चर्य होता है और वे इनके संग सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उदयपुर को बदनाम करते है। ऐसा ही एक ट्वीट वेन्डी डॉर्लिंग नाम की एक ट्रैवेल ब्लॉगर ने डाला है जिसमे वो कहती है रात में भी सड़को पर मवेशी। दूसरे यूजर ने गधों को जगदीश चौक से गुजरते फोटो के साथ ट्वीट किया और लिखा आप ओर ज्यादा देख सकते है।
साफ़ था कि ये ट्वीट उदयपुर की प्रशाशनिक व्यवस्था की खिल्ली उड़ाकर साथ में उदयपुर को भी बदनाम कर रहे है। वैसे भी इस साल पर्यटक कम आये है। ऐसे ट्वीट ओर कोड में खाज बन कर पर्यटन इंडस्ट्री को बर्बाद कर रहे है। नगर निगम उदयपुर चैन की बंसी बजा रहा है और अपने कर्मियों के कार्य निरीक्षण के लिए अधिकारी जेहमत उठाने में कोई रूचि नहीं लेते है। अगर आप नगर निगम उदयपुर जाकर मवेशी उठाने का रिकॉर्ड चेक करेंगे तो आपको आश्चर्य और गुस्सा दोनों आएगा।नगर निगम उदयपुर की मवेशी पकड़ने वाली टीम के पास न कोई प्रतिदिन का लक्ष्य होता है ? कितने पकड़ने है इसका कोई भान नहीं होता। आधे समय निगम कर्मचारी आपको टाइम पास करते मिल जाएंगे।
न कोई देखने वाला न कोई सुनने वाला।