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Current News / विकसित राजस्थान में शिक्षा की भूमिका पर हुआ मंथन - जेईसीआरसी में दो दिवसीय परिसंवाद 'राजस्थान ज्ञान सभा-2083' का आयोजन

clean-udaipur विकसित राजस्थान में शिक्षा की भूमिका पर हुआ मंथन - जेईसीआरसी में दो दिवसीय परिसंवाद 'राजस्थान ज्ञान सभा-2083' का आयोजन
Aayushman Bhatt March 22, 2026 02:14 PM IST
जयपुर, 21 मार्च। राजस्थान में शिक्षा के परिदृश्य पर समग्र चर्चा के लिए दो दिवसीय परिसंवाद 'राजस्थान ज्ञान सभा- 2083' शनिवार को जेईसीआरसी विश्वविद्यालय परिसर में प्रारंभ हुआ। 'विकसित राजस्थान के लिए शिक्षा' विषय पर आयोजित परिसंवाद का  उद्घाटन करते हुए शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि हमारी शिक्षा मूल्य आधारित होनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 में भी सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है। उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कार के समावेश पर जोर देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति की शिक्षा के विकास में भूमिका पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपराओं में अधिकतम सवालों के जवाब निहित हैं। राजस्थान और देश का भौतिक विकास केवल शिक्षा से ही संभव है। आयुक्त कॉलेज शिक्षा राजस्थान डॉ. ओपी बैरवा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विकास करना है। भविष्य आधारित विकास के लिए शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का समावेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा​​ कि कौशल व रोजगार आधारित शिक्षा आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। युवाओं को रोजगार की गारंटी देने के लिए कॉर्पोरेट सर्टिफिकेशन कोर्स विकसित किए जा रहे हैं। 
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख श्री सुनील सुखदेवभाई मेहता, वाईस चेयरपर्सन जेईसीआरसी विश्वविद्यालय श्री अमित अग्रवाल व प्रेसिडेंट जेईसीआरसी प्रो. विक्टर गंभीर ने भी शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। 
 
कार्यक्रम के तहत 'राजस्थान की शिक्षा में संस्कार व्यवस्था: समाज का मौन संविधान- शिक्षा के माध्यम से सामाजिक मूल्यों एवं चरित्र निर्माण की भूमिका' विषयक सत्र में अतिरिक्त मुख्य सचिव तकनीकी शिक्षा राजस्थान श्री कुलदीप रांका ने मनुष्य जीवन में शिक्षा के आरंभ से लेकर वर्तमान तक के परिदृश्य पर बात करते हुए कहा कि नए विकास से पूरी संस्कृति प्रभावित होती है और तकनीक के चलते आगामी दिनों में रोजमर्रा के कार्यों में मनुष्य का महत्व कम होता चला जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मूल्य आधारित शिक्षा का महत्व है और मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए हमे सही फैसले लेने होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अनुभव आधारित शिक्षण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। 
इस सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख श्री सुनील सुखदेवभाई मेहता ने सामाजिक मूल्य एवं चरित्र निर्माण को जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि समाज के प्रति आज संवेदना कम होती जा रही है। पूर्व शिक्षा मंत्री भारत सरकार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि एनईपी का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से मानवों को मशीन नहीं बल्कि मनुष्य बनाना है।
 
नवाचारों से बेहतर हुआ राजस्थान का शैक्षणिक परिदृश्य- 
 
परिसंवाद के द्वितीय सत्र में समग्र शिक्षा राजस्थान की उपायुक्त डॉ. निधि सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग के नवाचारों व गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की क्रियान्विति के लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान चलाया जा रहा है। ऐसा अभियान चलाने वाला राजस्थान पहला राज्य है। उन्होंने निपुण राजस्थान अभियान, प्रखर अभियान, एआई आधारित सीबीए मूल्यांकन, एफएलएन गतिविधियों सहित शिक्षा विभाग की ओर से चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग की योजनाओं से जुड़े विभिन्न सवालों के जवाब भी दिए। इस सत्र में सहायक प्रोफेसर आरआईई अजमेर डॅा. गणेश दत्त व डाइट जालोर प्रिंसिपल श्री शांति लाल ने भी विषय पर व्याख्यान दिया।
 
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