मोदी पर भरोसा नहीं तो अपनी आर्मी पर करो,वर्ना इतिहास नहीं करेगा माफ़ !
मोदी पर भरोसा नहीं तो अपनी आर्मी पर करो,वर्ना इतिहास नहीं करेगा माफ़ !
चीन के साथ जो हुआ, उस पर आज मैंने लोगों की त्वरित प्रतिक्रिया देखीं, काफी लोग बड़े खुश थे, कि मोदी के रहते 3 को मार दिया, कुछ लोग ये सोचकर दुखी थे कि पता नहीं मोदी पाकिस्तान की तरह सर्जिकल स्ट्राइक टाइप चीन पर कर पाएगा कि नहीं। ये खुशी या दुख, इसके पीछे एक मनोवृत्ति है, ये इनकी गलती नहीं है, इस देश पर इतना अत्याचार हुआ है, इतने हमले हुए हैं कि इनके अंदर का स्वाभिमान, गौरव और सबसे ज्यादा आत्मविश्वास कब का मर चुका है। 2014 से पहले तो पाकिस्तान भी कुछ कर जाता था, तब भी हम इसी तरह की प्रतिक्रिया देते थे।
बाबर का जब हमला हुआ था तो एक जगह डर के मारे एक जगह लोग मुंह में घास डालकर जमीन पर जानवर की तरह हाथ और पैर दोनों रखकर लोग खड़े हो गए थे, ये बताने के लिए कि वो तो निरीह गाय हैं और बाबर ने उनके सर काटकर सरों की मीनार बनवा दी। ऐसे तमाम किस्से हैं, सदियों में तार तार होते इस देश के खोते आत्मविश्वास के। जब महाराणा प्रताप ने अपना सर अकबर के सामने झुकाने से मना कर दिया था तो वीर राजपूतों तक ने उनका साथ नहीं दिया था, शिवाजी को मुस्लिम कम औरंगजेब के हिंदू दरबारी ही चूहा कहते थे- पहाड़ी चूहा। सो जो मन में आया वो ठेलता रहा इन्हें, इन्हें माफ कर दीजिए, इनके अंदर का स्व मर चुका है।
चीन को लेकर तो इनके अंदर इतना खौफ है, उसकी वजह मोदीजी नहीं नेहरूजी हैं, इतने बुरी तरह पिटे थे कि अक्साई चिन की बात करने पर संसद में कह रहे थे कि वहां घास का तिनका तक नहीं उगता, हम क्या करेंगे। अपने अंदर झांकिए, क्या ये उसी हार का खौफ नहीं है, जो मोदी को ढाल बनाकर अपनी आर्मी की खिल्ली उडा रहा है, गोली से नहीं मरे, वो वीर लड़ते लड़ते मरे हैं, उनके भी मरे हैं, वो कायर छुपा रहे हैं। इसकी वजह ही वो आत्मविश्वास है, जो गलत इतिहास की वजह से आपके अंदर मर गया है।
आप उस शाहजहां को जो मुमताज की मौत के बाद नंगा होकर लड़कियों के साथ पेंटिंग बनवाता है, उसको प्रेम का पुजारी पढ़ते आए हैं (ऐसे 50 महान शासकों के तथ्य हैं मेरे पास, लोग बुरा मान जाएंगे), आप उन इतिहासकारों को पढ़ते हैं जो बाबरी पर बीबी लाल की रिपोर्ट गलत बताते रहे, सनौली से 4000 साल पुराने रथ निकलने के बावजूद, कालीबंगा से घरों में अग्नि वेदियां मिलने के बावजूद, पशुपति की मोहर और तमाम शिवलिंग मिलने के बावजूद आर्यों को बाहर का पढ़ते आए हैं, आप चित्तौड़ के फतहनामा जारी करने के बावजूद जावेद अख्तर के उस बयान पर भरोसा करते हैं जिसमें अकबर को भारत में सेकुलरिज्म की शुरूआत का श्रेय वो देते हैं। आप नेपोलियन से पहले समुद्रगुप्त के पैदा होने के बावजूद किताबों में समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन पढ़ते हो। गिनती जो यूरोप में अरेबियन और अरब में हिंदसा कही जाती है, आप उसको अंग्रेजी काउंटिंग बताते हो। ईंटों की चिनाई की पद्धति जो हडप्पा में मिली है, उसे इंगलिश बॉन्ड कहते हो। क्योंकि आप एक मरी हुई जाति हैं, एक कौम जिसके मन में बाहर से आए आंक्राताओं का खौफ बढ़ गया है। उस पर गलत इतिहास ने आपके दिमाग में गंदा असर डाला है।
पहले इन बाहरियों की वजह से पर्दा प्रथा, सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं आती रहीं, फिर इनको खत्म करने का श्रेय भी इन्हीं को देते आए हैं, क्योंकि आपने ऐसा इतिहास में पढ़ा है। अभी भी लाखों लोग ऐसे मिल जाएंगे जो देश में तमाम कामों का श्रेय इन अंग्रेजों या बाहरी आंक्रांताओं को देते हैं, काफी कुछ लिखने को है, लेकिन जगह कम है औऱ फैक्ट्स बहुत ज्यादा। कहने का सीधा मतलब ये है कि मोदी पर भरोसा नहीं तो अपनी आर्मी पर करो, सोचो एक अकेले वीर अब्दुल हमीद ने कैसे इतने टैंक उड़ाए होंगे, जाओ परमवीर चक्र विजेताओं की कहानियां पढ़ो, इसी चीन को कैसे सबके सिखाया था, उस कहानी के लिए ‘पलटन’ फिल्म देखो।
परमाणु सम्पन्न देश हो, घसियारे नहीं... और सबसे बड़ी बात कि पाकिस्तान की तरह गलत काम भी नहीं करते हो, सच्चे हो तो सच की ताकत अपने अंदर फील करो, हार भी गए तो क्या हुआ, ऐसा कौन है जो हारा नहीं, हार कर दोबारा लड़ने के लिए ना उठ पाए, वो हार है... असली हार वो है जो मन में हार जाए, खौफ में मर जाए, अपनों की वीरता पर ही सवाल उठाए... आप हारे नहीं हो, आपकी सोच हार चुकी है, पराजितों जैसा व्यवहार मत करो
लेखक: विष्णु शर्मा
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लेखक विष्णु शर्मा इतिहास के ब्लॉगर हैं, पत्रकार हैं, इतिहास से नेट क्वालीफाइड हैं, एमफिल कर चुके हैं। इंडियन हिस्ट्री पर उनका काम यूट्यूब से लेकर तमाम बेवसाइट्स पर बिखरा पड़ा है।