मुग़लो को जीता था उदयपुर के एक गाँव ने,याद में मनाते है तलवारों और बारूद से होली !
होली के त्यौहार में देश भर में अलग–अलग उत्सव देखने को मिलते हैं। जहाँ एक ओर बरसाने की लट्ठमार होली दुनिया भर में मशहूर है तो वही उदयपुर जिले के मेनार नाम का ऐसा गांव है, जहां मेनारिया ब्राह्मण समाज के लोग बारूद से होली खेलते हैं। राजाओं के ज़माने से चली आ रही ये परंपरा गांव में आज भी बदस्तूर जारी है।
बारूद से होली खेलने से पहले समाज के तमाम लोग पारंपरिक वेश-भूषा में एक योद्धा के रूप में गांव के बीचो-बीच जमा होते हैं। यह तमाम लोग पहले तलवारों से अपना परंपरागत गैर नृत्य करते हैं। इसके बाद गाँव में बारूद से होली खेली जाती हैं। इस दौरान बंदूकों और तोपों से बारूद बरसाया जाता है। ये नजारा किसी युद्ध की तरह नज़र आता है।
दरअसल, महाराणा उदय सिंह के समय मेनार गांव के पास मुगलों की एक चौकी थी, जहां से मुगल सेना ने मेवाड़ पर आक्रमण करने को योजना बनायी। इसकी जानकारी गांव के मेनारिया ब्राह्मण समाज के लोगों को लग गयी। सर्वसम्मति से ये सभी वीर योद्धा की तरह मुगलों की चौकी पर टूट पड़े, जिसमें मेनारिया समाज के कुछ लोग शहीद भी हुए लेकिन वे मुगलों को खदेड़ने में सफल रहे। इसके बाद से ही मेनार गांव में होली के दूसरे दिन जमरा बीज के मौके पर लोग बारूद से होली खेल कर मुगल सेना पर अपनी जीत का जश्न मनाते हैं। मेनारिया समाज के इस वीरता पर उन्हें मेवाड़ के महाराणा ने विशेष उपाधि भी प्रदान की थी।