अशोक गहलोत ने कोरोना जाँच हेतु रैपिड एंटीबाडी टेस्ट किये शुरू,करी राहत भरी घोषणाएँ !
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मॉडिफाइड लॉकडाउन को लेकर उप मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, संबंधित विभागों के सचिव एवं जिला कलेक्टर के साथ समीक्षा बैठक कर लोगों को कोरोना महामारी के दौर में सरकार द्वारा किये गए प्रयासों के बारे में जानकारी दी ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की जनता, प्रशासन, सरकार ने यह साबित कर दिया है कि संकट की घड़ी में सब एक साथ खडे़ हैं और प्रदेश को इससे बाहर निकालने की क्षमता रखते हैं। कोरोना की रोकथाम के लिए राजस्थान में हर स्तर पर एकजुटता के साथ काम किया जा रहा है। यही एकजुटता हमें कोरोना को हराने में सफलता दिलाएगी।
कोरोना के प्लाजमा ट्रीटमेंट के सवाल पर कहा कि इसके लिए हो रहे शोध में एसएमएस अस्पताल भी जुड़ा हुआ है। एसएमएस के चार दवाओं के कॉम्बीनेशन पर भी दुनिया के देशों में रिसर्च हो रही है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए राजस्थान के चिकित्सा विशेषज्ञों सहित हर व्यक्ति ने बेहतरीन काम किया है।
प्रदेश में कोरोना की जांच की संख्या में कोई कमी नहीं की गई है। बीते कुछ दिनों में पॉजिटिव मामलों की संख्या कम हुई है, इसका यह कतई मतलब नहीं कि टेस्ट की संख्या कम की गई है। राजस्थान में देश में सबसे ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं। अब तक 42 हजार 751 टेस्ट किए जा चुके हैं।
प्रदेश के हर जिले में कोरोना जांच के लिए लैब स्थापित करने पर काम शुरू कर दिया गया है। जनसंख्या तथा औद्योगिक इकाइयां ज्यादा होने के कारण सबसे पहले अलवर में यह लैब स्थापित की जा रही है। सब्जी विक्रेताओं, खाद्य पदार्थों आदि की होम डिलीवरी करने वालों के भी रेपिड टेस्ट करवाए जाएंगे।
20 अप्रेल से शुरू होने वाले मॉडिफाइड लॉकडाउन के दौरान मास्क लगाने, सामाजिक दूरी बनाने सहित सभी प्रोटोकॉल की पालना में कोई ढील नहीं दी जाएगी। केवल उद्योग-धंधों और काम पर आने-जाने के लिए मूवमेंट में आंशिक छूट केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप दी जाएगी।
अब किट उपलब्ध हो गए हैं तो रेंडम टेस्ट शुरू किए जाएंगे। इससे संक्रमण की वास्तविकता का पता चल सकेगा। अभी प्रदेश में पर्याप्त संख्या में पीसीआर टेस्ट किट, पीपीई किट और वेंटीलेटर्स उपलब्ध हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आगे कहा कि हमारा प्रयास है इसके संक्रमण को रोकने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया जाए। इसके लिए आज से रेपिड टेस्ट भी शुरू कर दिए हैं। कोरोना की जांच स्थानीय स्तर पर भी हो सके,इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में लैब स्थापित करने,आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए बडे़ स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें पैम्पलेट, वीडियो, लेख आदि के माध्यम से उन्हें प्रेरित और शिक्षित किया जाए। कोरोना से लड़ाई में दिन-रात जुटे कार्मिकों का कॉन्फिडेंस भी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
आजीविका के सवाल पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कहा कि कुछ काम-धंधे 20 अप्रेल के बाद शुरू हो जाएंगे तो कुछ लोगों को काम मिल जाएगा। उसके बाद आकलन कर शेष मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की योजनाएं बनाई जाएंगी।राजस्थान पहला राज्य है, जहां मजदूरों की परेशानी को दूर करने का लक्ष्य रखकर काम शुरू किया गया है। ऐसा होने से मजदूरों का टूटा मनोबल लौट सकेगा और वे अपने रोजगार पर वापस आने में सहूलियत महसूस करेंगे। एक मीडियाकर्मी के सवाल पर कहा कि राज्य सरकार स्वयं के लिए केंद्र सरकार से पैकेज मांग रही है, हमारा मानना है कि उद्योगों को भी इस संकट के दौर से बाहर आने के लिए मदद की जानी चाहिये। आमजनता, समाज और प्रशासन ने इसमें भरपूर सहयोग दिया है।
पूरी अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है, इससे निपटने के लिए सभी को कुछ त्याग करना पडे़गा। देश-प्रदेश और परिवारों को खर्चों में कटौती करनी पडे़गी। वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना पडे़गा, तभी सबकी तकलीफें कम हो सकेंगी।
ये एक राष्ट्रीय त्रासदी है,जिसमें सभी वर्ग परेशानी में हैं। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार की बजाय केंद्र सरकार की भूमिका अधिक है।कोरोना, लॉकडाउन से केवल मध्यम वर्ग नहीं, सभी वर्गों की परेशानियां बढ़ी हैं। खुद सरकारें भी विषम आर्थिक हालातों का सामना कर रही हैं।
चाहिए।
कोरोना के संक्रमण और लॉकडाउन के कारण देश में प्रवासी मजदूरों की समस्या बहुत गंभीर हो गई है। चाहे मजदूर अपने राज्य में रह रहे हों या दूसरे राज्य में उनका एक बार अपने घर जाना जरूरी है। ऐसे में 20 अप्रेल के बाद हो सकता है, भारत सरकार इसमें थोड़ी छूट दे दे।
कोई भी सरकार नहीं चाहेगी कि एक भी मरीज की संख्या बढे़, इसलिए क्वारेंटाइन फैसेलिटी में सामाजिक दूरी के प्रोटोकॉल की पूरी पालना की जाती है।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में कहा कि क्वारेंटाइन की सुविधा आबादी क्षेत्र के पास होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कोरोना हवा से फैलने वाली बीमारी नहीं है। क्वारेंटाइन सुविधा जगह की उपलब्धता और भोजन आदि की व्यवस्था सुलभ करवाने में आसानी होने के आधार पर तय की जाती है।
एक सवाल के जवाब में कहा कि मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार कोरोना पॉजिटिव मरीज का नाम जाहिर करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे कई बार मरीज को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
20 अप्रेल से शुरू होने वाले मॉडिफाइड लॉकडाउन के दौरान मास्क लगाने, सामाजिक दूरी बनाने सहित सभी प्रोटोकॉल की पालना में कोई ढील नहीं दी जाएगी। केवल उद्योग-धंधों और काम पर आने-जाने के लिए मूवमेंट में आंशिक छूट केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप दी जाएगी।
आज से रेपिड एंटी बॉडी टेस्ट के माध्यम से कोरोना की जांच शुरू हो गई है। रेपिड टेस्ट करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है। पहले दिन 60 जांच की गई, जो सभी नेगेटिव पाई गईं।कोरोना के प्लाजमा ट्रीटमेंट के सवाल पर कहा कि इसके लिए हो रहे शोध में एसएमएस अस्पताल भी जुड़ा हुआ है। एसएमएस के चार दवाओं के कॉम्बीनेशन पर भी दुनिया के देशों में रिसर्च हो रही है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए राजस्थान के चिकित्सा विशेषज्ञों सहित हर व्यक्ति ने बेहतरीन काम किया है।
लॉकडाउन के दौरान लंबे समय तक घरों में रहने और व्यवसाय बंद रहने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जनता का मनोबल बनाए रखना जरूरी है। शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों और विशेषज्ञों के सहयोग से लोगों को मोटिवेट किया जाना चाहिए।
गर्मियों में प्रदेशभर में पेयजल की सुचारू आपूर्ति के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार कर लिया गया है। इसके लिए 65 करोड़ रूपए की राशि भी स्वीकृत कर दी गई है। सरकार ने यह ध्यान रखा है कि लॉकडाउन के कारण लोगों को अधिक पानी की जरूरत होगी। सभी को पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को सीधे खरीद के 1530 लाइसेंस जारी किए गए हैं। प्रदेश कोरोना की जांच के मामले में अग्रणी है।
लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे राजस्थान के श्रमिकों एवं यहां रह रहे अन्य राज्यों के मजदूरों आदि की परेशानियों को लेकर राज्य सरकार गंभीर है। उन्हें अपने-अपने घर पहुंचाने के लिए हम लगातार भारत सरकार से बातचीत कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इसका कोई हल निकलेगा।
अन्य राज्यों में फंसे राजस्थानियों को राहत देने के लिए संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी निरंतर संवाद किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में अटके हुए लोगों की समस्याओं का भी जल्द समाधान निकालेंगे।