शाह के कहने पर देर रात 2 बजे निजामुद्दीन मरकज पहुंचे NSA अजित डोवाल,मरकज खाली करवाने में दिया योगदान !
कोरोना वायरस संकट के बीच ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से मिले करीब 2000 लोग अब सिरदर्द बनते जा रहे हैं। हद तो ये कि निजामुद्दीन मरकज के मौलाना साद संकट के बीच भी दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियो की सुनने को तैयार नहीं थे। निजामुद्दीन मरकज के मौलाना साद ने बंगलेवाली मस्जिद को खाली करने से साफ इनकार कर दिया था। फिर इस मामले को सुलझाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को फील्ड में उतरना पड़ा ।
दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मरकज से कोरोना के 24 मरीज मिलने के बाद हड़कंप मच गया था। इसके बाद तबलीगी जमात से जुडे 350 लोगों को राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया।इसके बाद जब निजामुद्दीन मरकज के प्रमुख मौलाना साद ने बंगालीवाली मस्जिद को खाली करने के लिए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की बात मानने से इनकार कर दिया, तो गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मोर्चा संभालने को कहा।
गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मरकज में 28-29 मार्च की रात लगभग 2.00 बजे पहुंचे और मौलाना साद को कहा कि वह कब्जेदारों की कोविड -19 संक्रमण की जांच करवाएं। शाह और डोभाल स्थिति के बारे में जानते थे क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों ने तेलंगाना के करीमनगर में नौ टेस्ट पॉजिटिव इंडोनेशियाई लोगों को 18 मार्च को मरकज से आने के बाद ट्रैक किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने अगले दिन मरकज संक्रमण के बारे में सभी राज्य पुलिस और सहायक कार्यालयों को अलर्ट भेजा था। जबकि मरकज ने 28 और 29 मार्च को 167 तब्लीगी कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी थी, लेकिन डोभाल के हस्तक्षेप के बाद ही जमात नेतृत्व ने मस्जिद की सफाई की। डोभाल ने पिछले दशकों में भारत और विदेशों में विभिन्न मुस्लिम आंदोलनों के साथ बहुत करीबी संबंध बनाए हैं। वह लगभग सभी मुस्लिम उलेमाओं को जानते हैं और देश के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाने के लिए उनके साथ समय बिताते हैं।