अब हवा के रास्ते फैल रहा कोरोना वायरस, लैंसेट की रिपोर्ट में बड़ा दावा !
पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप से गुजर रही है और दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश है जो इस महामारी से अछूता रह गया हो। समय के साथ ये बीमारी अपना रूप बदलती जा रही है और भारत समेत कई देशों में इस वक्त पहले से भी ज्यादा भयावह हालात होते जा रहे है। इससे बचने के लिए कई वैक्सीनें तक अंतराष्ट्रीय बाज़ारो में आ गई हैं लेकिन अभी भी कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके पुख्ता जवाब संभवतया नहीं मिले हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण सवाल है कि आखिर वायरस फैलता कैसे है?
इस कोरोना काल में आपने 'एयरबोर्न ट्रांसमिशन' के बारे में कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये एयरबोर्न ट्रांसमिशन आखिर होता क्या है? दरअसल, आसान शब्दों में कहें तो कोरोना वायरस का हवा में होना और उसके जरिये फैलना ही एयरबोर्न ट्रांसमिशन कहलाता है। कोरोना महामारी की शुरुआत में ही कई देशों के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया था कि कोरोना वायरस हवा के जरिये भी फैलता है। हालांकि उस समय इसके पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस पर कुछ ज्यादा ध्यान नहीं दिया था, लेकिन अब 'द लैंसेट' के नए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस हवा में भी फैलता है और इस दावे को साबित करने के लिए सबूत भी पेश किए गए हैं।
कोरोना वायरस के फैलने को लेकर आमतौर पर यही मान्यता रही है कि यह संक्रमित मरीज के खांसने, छींकने या बोलने के दौरान नाक या मुंह से निकले ड्रॉपलेट्स के जरिये या फिर संक्रमित सतहों को छूने से फैलता है, लेकिन नए अध्ययन में कहा गया है कि ड्रॉपलेट्स की बजाय एयरबोर्न यानी हवा के जरिये संक्रमण फैलना ज्यादा आसान है।
हालांकि मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. फहीम यूनुस ने एक ट्वीट के माध्यम से कहा कि एयरबोर्न का मतलब यह नहीं है कि बाहर की हवा वायरस से दूषित हो गई है, बल्कि इसका मतलब यह है कि वायरस हवा में मौजूद हो सकता है, खासकर इनडोर वातावरण यानी बंद कमरे में, और यह खतरा पैदा कर सकता है। दरअसल, इसकी वजह ये है कि बंद कमरे में हवा का बहाव नहीं होता, जैसा खुले में होता है। ऐसी हवा स्थिर रहती है और दूषित हो जाती है, जिससे अन्य लोग भी संक्रमित हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण का कारण वही हवा बन सकती है, जिसमें कोरोना वायरस मौजूद हो। अस्पताल, होटल के वातावरण में भले ही संक्रमण के फैलने की संभावना हो, लेकिन खुली या ताजी हवा में ऐसी संभावना नहीं रह जाती है। हालांकि यह स्पष्ट रूप से कहने के लिए इसपर अभी और शोध की जरूरत है।
तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए मन में यह सवाल भी आता है कि क्या यह हवा में घुल चुका है ? तो प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'द लांसेट' में छपी एक स्टडी में इस बात का दावा भी कर दिया गया है कि ज्यादातर ट्रांसमिशन हवा के रास्ते (aerosol) से हो रहा है। इस दावे को साबित करने के लिए स्टडी में 10 कारण दिए गए हैं-
- द लांसेट स्टडी में बताया गया है कि वायरस के सुपरस्प्रेडर इवेंट महामारी को तेजी से आगे ले जाते हैं। इसमें कहा गया है कि ऐसे ट्रांसमिशन का हवा के जरिए होना ज्यादा आसान है बजाय बूंदों के। ऐसे इवेंट्स की ज्यादा संख्या के आधार पर इस ट्रांसमिशन को अहम माना जाता सकता है।
- लैब में SARS-CoV-2 वायरस हवा में मिलने का दावा किया गया है। इस दौरान वायरस 3 घंटे तक हवा में संक्रामक हालत में रहा।
- कोविड-19 मरीजों के कमरों और कार में हवा के सैंपल में वायरस मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि हवा में वायरस का सैंपल इकट्ठा करना काफी चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए तकनीकी कमियां होती हैं और वायरस को लैब तक लाना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए खसरे और टीबी का उदाहरण दिया गया है जो फैलती हवा से हैं लेकिन लैब में इन्हें कमरे की हवा से लेकर कल्चर नहीं किया जा सका है।
- बिना एक-दूसरे के कमरे में गए ,क्वारंटीन होटलों में एक-दूसरे से सटे कमरों में रह रहे लोगों के बीच ट्रांसमिशन देखा गया है ।
- बिना लक्षण या लक्षण से पहले ऐसे लोगों से ट्रांसमिशन जिन्हें खांसी या छींक ना आ रही हो, उनसे ट्रांसमिशन के कम से कम एक तिहाई मामले हैं और दुनियाभर में वायरस फैलने का यह एक बड़ा जरिया है। इससे हवा के रास्ते वायरस फैलने की बात को बल मिलता है। स्टडी में यह भी कहा गया है कि बोलते वक्त हजारों पार्टिकल पैदा होते हैं और कई बड़ी बूंदें जिससे हवा के जरिए वायरस फैलने का रास्ता खुलता है।
- इमारतों के अंदर ट्रांसमिशन बाहर के मुकाबले ज्यादा है और वेंटिलेशन होने से यह कम हो जाता है।
- अस्पतालों और मेडिकल संगठनों के अंदर भी इन्फेक्शन फैला है जहां कॉन्टैक्ट और ड्रॉपलेट से जुड़े कड़े नियमों, जैसे PPE तक का पालन किया जाता है।
- अस्पतालों और कोविड-19 के मरीजों वाली इमारतों के एयर फिल्टर्स और डक्ट में वायरस मिला है जहां सिर्फ aerosol पहुंच सकते हैं।
- अलग-अलग पिंजड़ों में कैद जानवरों में भी ट्रांसमिशन मिला है जो एयर डक्ट से ही जुड़े थे।
- हवा से वायरस नहीं फैलता, यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
- दूसरे तरीकों से वायरस फैलने के कम सबूत हैं।

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