ABVP ने MLSU के प्रोफेसरों के खिलाफ लगाया राजद्रोह का आरोप !
उदयपुर शहर में AIPWA नेशनल कॉन्फ्रेंस की मेजबानी के लिए AIPWA VP और प्रो सुधा चौधरी ,कला महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक प्रोफेसर संजय लोढ़ा ,प्रोफेसर सुधा चौधरी डॉक्टर गिरिराज सिंह के खिलाफ राजद्रोह के आरोप आदि की मांग करते हुए ABVP ने मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी उदयपुर के वीसी को पत्र दिया है । उन्होंने दावा किया कि वे सीएए विरोध को यूनिवर्सिटी में फ़ैलाने का काम कर रहे हैं।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के महिला संगठन का 8 फरवरी को ऐपवा राष्ट्रीय सम्मेलन उदयपुर में आयोजित हुआ था । जिसकी मुख्य अथिति विवादित पत्रकार राणा अय्यूब थी जो बेवजह लोगो को CAA ,NRC और NPR जैसे मुद्दों पर लोगो को बरगलाया करती है।
ABVP का लेटर में क्या लिखा गया ?
" विषय अंतर्गत निवेदन है कि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर संभाग का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है और उदयपुर संभाग जनजाति बहुल क्षेत्र है जिसमें गत कई दिनों से खुले रूप से वामपंथी विचारधारा के शिक्षकों द्वारा संविधान विरोधी एवं देश विरोधी गतिविधियों को संचालित करने का काम किया जा रहा है। जिसमें वर्तमान समय में ऐपवा नाम के एक महिला संगठन द्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें भारतीय नागरिकता अधिनियम का खुला विरोध विश्वविद्यालय के संगठित कला महाविद्यालय के वामपंथी शिक्षकों द्वारा रैली निकालने के साथ-साथ दो दिवसीय सम्मेलन के सत्रों में कानून के खिलाफ और देश के तमाम केंद्र सरकार विरोधी विषयों पर चर्चा की गई इस तरीके से विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा भारतीय संविधान जो कि देश के प्रत्येक नागरिक का सम्मान है उसके द्वारा पारित कानून का इस तरीके से खुला विरोध करना देश विरोधी गतिविधि करना है। जिस प्रकार जवाहरलाल नेहरू केंद्रीय विश्वविद्यालय दिल्ली में वामपंथी विचारधारा विद्यार्थियों को भ्रमित कर शिक्षा के मंदिर में देश विरोधी गतिविधियां आयोजित की जा रही है उसी प्रकार सुखाड़िया विश्वविद्यालय में वामपंथी विचारधारा से जुड़े शिक्षकों द्वारा जनजाति क्षेत्र के विद्यार्थियों को भ्रमित कर देश विरोधी गतिविधियों की ओर धकेल कर यहां के शैक्षणिक माहौल को खराब करने का संगीत प्रयास किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से कला महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक प्रोफेसर संजय लोढ़ा प्रोफेसर सुधा चौधरी डॉक्टर गिरिराज सिंह सहित कई वामपंथी शिक्षकों द्वारा देश में होने वाली विभिन्न केंद्र सरकार के निर्णय पर अपनी विरोधी प्रतिक्रिया देने का एक सिलसिला प्रारंभ किया जिसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम धारा 370 35A का खुला विरोध कर कहीं ना कहीं भारतीय संविधान को चुनौती देने का एक गंदा प्रयास है। विश्वविद्यालय के प्रधान होने के नाते देश के संविधान और विश्वविद्यालय की गरिमा को बचाने की जिम्मेदारी आपकी है अतः आपके द्वारा इस तरह की गतिविधियों के बावजूद भी निर्णय लेना कहीं ना कहीं ऐसे असामाजिक तत्वों को ताकत देना है। आलम यह है कि आपके ही कैंपस में इस प्रकार की गतिविधियों के साथ-साथ ऐसे शिक्षकों को विश्वविद्यालय के अनुचित लाभ दिए जा रहे हैं जिनमें प्रोफेसर की आवास व्यवस्था कम योग्यता वाले शिक्षकों को विद्यालय की संपत्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है जो नियमित रूप से अनुचित है। "