कोरोना पीड़ित मृतको का अंतिम संस्कार करते है मुस्लिम समाज के अब्दुल मालाबरी!
पूरी दुनिया में कोरोना महामारी से लड़ने के लिए डॉक्टर ,स्वास्थ्य कर्मी, सफाई कर्मी ,पुलिसकर्मी और मीडिया के लोग अपनी जान दांव पर लगाकर मानवता की सेवा करने में रात दिन लगे हुए हैं ।वहीं शिक्षकों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी इस बीमारी में लड़ने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं ।वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पर्दे के पीछे मौन मूक तरीके से इस महामारी के दौर में अपनी सेवाएं देकर मानव समाज का भला कर रहे हैं ।जब कोरोनावायरस से हर व्यक्ति डर रहा है वही एक व्यक्ति ऐसा भी है जो इस मुश्किल दौर में जाति -धर्म की परवाह किए बिना कोरोना पॉजिटिव मृत लोगों का अंतिम संस्कार कर रहा है।
गुजरात के सूरत शहर में कोरोना संक्रमित लाशों के अंतिम संस्कार के लिए एक व्यक्ति अपनी संस्था के माध्यम से समाज सेवा कर रहा है और उस व्यक्ति का नाम है अब्दुल मालाबरी ।
संक्रमण के डर की वजह से परिजनों को लाशों के पास आने नहीं दिया जाता है और ऐसी संक्रमित लाशों का अंतिम संस्कार अब्दुल मालाबरी और उनकी टीम के द्वारा ही किया जाता है।
दुनिया में कोरोना संक्रमण बढ़ने की घटनाओं को देखते हुए जब सूरत नगर निगम ने अब्दुल मालाबरी से संपर्क किया और बताया कि शव परिजनों को नहीं सौपे जाएंगे तो क्या ऐसे में संक्रमित व्यक्तियों का अंतिम संस्कार क्या आप कर सकते हैं ? यह सुनकर एकता ट्रस्ट के अब्दुल मालाबरी इस बाबत तुरंत राजी हो गए।
जब भी जिला अधिकारियों के द्वारा इस बाबत सूचना आती है ,अब्दुल मालाबरी और उनकी टीम अपने प्रोटेक्टिव किट के साथ शवों के अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़ती है और अपनी टीम को इस संक्रमण से बचाने के लिए मालाबरी प्रोटेक्टिव किट के साथ डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी दिशा निर्देशों की पूर्णता पालना करते हैं
उनके अनुसार पहले शव पर रसायन छिड़का जाता है और फिर उसे पूरी तरीके से सील कर दिया जाता है। उनकी टीम द्वारा आरक्षित दो वाहनों से शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाता है और इन दोनों गाड़ियों का नियमित सैनिटाइजेशन भी किया जाता है ।मालाबारी कहते हैं कि उनके इस कार्य में पुलिस फायर ब्रिगेड और नगर निगम की टीमें भी उनकी मदद करती हैं।
मालाबारी कहते हैं की जब कोई व्यक्ति संक्रमण से काल कवलित हो जाता है तो उनके परिवार वालों को क्वॉरेंटाइन कर दिया जाता है ।ऐसे में परिवार वालों का वियोग देखकर उन्हें भी बहुत दुख होता है । लेकिन ये उनकी जिम्मेदारी है कि वह संक्रमित व्यक्ति का उचित रीति नीति से अंतिम संस्कार करें ।कभी-कभी रिश्तेदारों को संस्कार स्थल तक एक अलग वाहन में ले जाया जाता है और दूर से ही अंतिम संस्कार को देखने को कहा जाता है ।अंतिम संस्कार करने के बाद में अब्दुल और उनकी टीम हाथ और पैर गर्म पानी से धोते हैं और उसके बाद साफ कपड़े पहनते हैं ।अंतिम संस्कार के दौरान प्रोटेक्टिव किट का इस्तेमाल किया जाता है। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि अब्दुल मालाबरी भी खुद अपने परिवार से दूर रहकर अपने ऑफिस में दिन गुजार रहे हैं ताकि उनके परिवार को इस से कोई खतरा पैदा ना हो। उनके दफ्तर में ही उनके रहने और खाने की व्यवस्था की गई है।
क्योंकि अब्दुल मालाबरी और उनकी टीम कोरोना संक्रमित मृत लाशों का अंतिम संस्कार कर रही है तो ऐसे में अब लोग उनसे दूरी बना कर रहते हैं और कोई अब उनकी गाड़ी में भी नहीं बैठता है ।वह कहते हैं उन्हें इसकी परवाह नहीं है और वह अपना काम अनवरत जारी रखेंगे।