सीकर की 90 साल की बिदामी देवी ने 9 दिन में कोरोना की जंग से पाई आजादी !

सीकर जिले के खाटूश्याम जी की 90 साल की बिदामी देवी ने 9 दिन में कोरोना की महामारी से जंग लड़कर आजादी पाई। उन्होंने कोविड सेंटर में डॉक्टरों ने जो भी दवाईयां बताई वह पूरी सावधानी बरतते हुए ली व सुबह-शाम अच्छी खुराक पर ध्यान दिया तथा कोविड सेंटर में नियमित रूप से टहलना जारी रखा। हर घंटे में हाथ अच्छी तरह से धोएं।
बिदामी देवी ने बताया कि जब मैं 15-16 साल की थी, जब पहली बार देश ने आजादी का जश्न मनाया था । उस समय सोचा नहीं था कि जीवन में कभी ऎसा संकट आएगा, जब खुद को एक बार फिर आजादी के लिए संघर्ष करना पडे़गा। उन्होंने बताया कि जुलाई माह में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मेरा सैम्पल लिया जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने कहा की मुझे अपने लिए कोई डर नहीं था, बस इस बात की चिंता थी कि मेरे परिवार के लोग स्वस्थ रहें। सांस लेने में तकलीफ होती थी, लेकन फिर भी मुहं पर मास्क हरदम लगाए रखा। मेरी 9 दिन बाद रिपोर्ट निगेटिव आई है। 27 जुलाई को मैं स्वस्थ होकर घर पहुंच गई। घर पर आने के बाद 14 दिन तक खुद को परिजनों और रिश्तेदारों से दूर रखा ताकि किसी और तक ये बीमारी न पहुंचे। बिदामी देवी का कहना है कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करें तथा अपने हाथ बार-बार धोते रहें सावधानी ही उसका उपचार हैं।
सुशीला हार्ट का ऑपरेशन करवाने आई थी जयपुर, 6 दिनों तक लड़ी कोरोना से जंग फिर रिपोर्ट आई निगेटिव
सीकर जिले के दांतारामगढ़ तहसील के खाटूश्यामजी की 42 वर्षीया सुशीला अपने हार्ट वॉल का ऑपरेशन करवाने जयपुर के जीवन रेखा अस्पताल में आई थी। जहां पर 7 मई को उसका सैंपल लिया गया था जो अगले दिन ही कोरोना पॉजिटिव पाई गई। इसके बाद सुशीला को जयपुर के एसएमएस अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया जहां पर चिकित्सकों द्वारा उसकी लगातार जांच व दवाईयां जारी रखी गई और उसने कोई भी लापरवाही नहीं बरतते हुए स्वच्छता का प्रतिदिन पूरा-पूरा ध्यान रखा।
सुशीला के 21 परिवारजनों को कोरोना संदिग्ध मानते हुए सैंपल लिए गये और उनकों श्री धाम धर्मशाला में आइसोलेट किया गया वहीं कुछ परिवारजनों को घर में ही होम आईसोलेट किया गया। लगातार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर के आस-पास में सर्वे व स्क्रीनिंग का कार्य निरन्तर जारी रहा। सुशीला की 13 मई को जांच रिपोर्ट निगेटिव आई तो उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया, साथ ही अगले दिन सभी परिवारजनों की भी जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई।
सुशीला ने बताया कि पहले पता नहीं चला कि कोई बीमारी इस तरह भी एक दूसरे को संक्रमित करती है। सुशीला ने बताया कि जांच के दौरान जैसे ही जयपुर से मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो मानों जिदंगी और मौत की लड़ाई में मेरी हिम्मत सी टूट गई। लेकिन सही समय पर सजक, सतर्क रहकर हिम्मत से काम लिया और मेरी और परिवार की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। सुशीला ने राज्य सरकार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का बेहतर चिकित्सकीय सुविधायें उपलब्ध करवाने पर धन्यवाद दिया।