उदयपुर के एमबी अस्पताल बाल चिकित्सालय में कोटा जैसे हालात ,औसतन 5 बच्चों की रोज मौत !
उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमबी अस्पताल के बाल चिकित्सालय में बच्चों की मौतों का सिलसिला पिछले तीन साल से बदस्तूर बढ़ता चला जा रहा है। पिछले तीन सालों में यहाँ 5153 बच्चे काल कलवित हो गए हैं। यानी एमबी अस्पताल हर साल औसतन 1717 और हर दिन 5 शिशुओं की बलि ले रहा हैं।
चिन्ता की बात ये है ये कि मौतें कम होने की बजाय साल दर साल बढ़ रही हैं। अस्पताल के PICU (पीआईसीयू) और तीन NICU (एनआईसीयू) में भर्ती रहने वाले गंभीर नवजातों के 26 वॉर्मर बेड पर ऑक्सीजन की सेंट्रलाइज्ड सप्लाई की कोई व्यवस्था नहीं है।आपको बताते चले कि हाल ही में विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल ने कोटा के जेकेलोन अस्पताल में ऑक्सीजन की सेंट्रलाइज्ड सप्लाई सीधे सभी नवजातों तक नहीं हो पाने को नौनिहालों की मौत का प्रमुख कारण बताया है। दुःख की बात तो ये है कि इसके महज 40 पाइंट ही ऐसे हैं, जिन्हें सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से जोड़ना है जिसका खर्च दस लाख रुपए है, लेकिन मंत्री, सांसद, विधायक और अफसर कभी हालात देखें तो इधर ध्यान जाए।
बाल चिकित्सालय उदयपुर के इन पीआईसीयू-आईसीयू के 26 बेड्स पर भर्ती होने वाले 26 नवजातों को ऑक्सीजन पुराने तरीके से सिलेंडर से दी जाती है जो कभी जानलेवा भी हो सकती है क्योंकि ऑक्सीजन सिलेंडर के खत्म होने पर दूसरे सिलेंडर लगाने में कम से कम आधे मिनट का समय लगता है। बाल चिकित्सालय में उदयपुर संभाग सहित मध्यप्रदेश तक से हर साल 20 हजार बीमार बच्चों को बेहतर इलाज की आस में भर्ती कराया जाता है।