वीडियो :उदयपुर स्मार्ट सिटी की गलती से टूटा पीपलेश्वर महादेव मंदिर,चमत्कार से टुटा नहीं गर्भगृह !
उदयपुर के नाइयों की तलाई के पास स्थित अर्चना अगरबत्ती गली में पीपलेश्वर महादेव का मंदिर स्मार्ट सिटी उदयपुर द्वारा चलाए जा रहे सीवरेज के काम से छतिग्रस्त हो गया है। पीपलेश्वर महादेव का यह अति प्राचीन मंदिर 300 साल से ज्यादा पुराना है। इस मंदिर का महाराणा सज्जन सिंह जी के काल में जीर्णोद्धार किया गया था। रावजी का हाटा, नाईयों की तलाई और अन्य स्थानों के लोग यहां पर शीतला माता जी की भी पूजा किया करते थे। पीपलेश्वर महादेव मंदिर पर जो पीपल का पेड़ लगा हुआ है उसकी चौड़ाई देखकर आप अंदाजा लगा लेंगे कि मंदिर और वृक्ष कितना पुराना है ?
स्मार्ट सिटी द्वारा जब सीवरेज का काम किया जा रहा था, तब मंदिर के पुजारी श्री अनिल शर्मा और स्थानीय निवासियों ने सीवरेज काम कर रही कंपनी एलएनटी सहित नगर निगम अधिकारियों को पीपल की चिंताजनक स्थिति के बारे में बताया और यह भी कहा कि सीवरेज के बाद में जो सड़क बनाई जा रही है ,उसमें वाइब्रेटर के कारण कंपन हो रहे हैं और उसी वाइब्रेशन और कंपन के कारण यह पुराना मंदिर पीपलेश्वर महादेव चिंताजनक स्थिति में आ गया है और साथ ही इसकी डालियां खतरे वाली स्थिति में पहुंच चुकी हैं। पूर्व में भी मंदिर के पुजारी श्री अनिल शर्मा ने कल के पेड़ की स्थिति के बारे में उदयपुर नगर निगम के अधिकारियों सहित पार्षद को बारे में बता दिया था। लेकिन ना तो उदयपुर नगर निगम के अधिकारियों की नींद उड़ पाई और ना ही उदयपुर स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने पीपलेश्वर महादेव के मंदिर की गंभीर स्थिति के बारे में सोचा और इसी कारण 8 दिन पहले पीपल का पेड़ देर रात धराशाई होकर गिर पड़ा।
इसे संयोग कहा जाए या भगवान का चमत्कार की मंदिर कि पूरी आरसीसी की छत टूट गयी। समीप स्थित ऑटो पर पेड़ गिर पड़ा और नजदीक स्थित मकान पर भी इसकी डालियां टूट कर गिरी लेकिन इस हादसे में कहीं कोई जनहानि नहीं हुई और चमत्कार की बात है कि 300 साल पुराना पीपल का पेड़ जिसकी चौड़ाई मंदिर के गर्भ ग्रह के आकार के बराबर है ,उसका सिर्फ गुंबद का एक हिस्सा ही टूट पाया और मंदिर का गर्भ ग्रह छत सहित सुरक्षित बच गया।
पीपलेश्वर महादेव के छोटे से गर्भ गृह में महादेव भगवान की प्रतिमा सहित अन्य सभी प्रतिमा हादसे के दौरान सुरक्षित रही। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह रही कि इतना चौड़ा पेड़ पीपलेश्वर महादेव मंदिर के पीछे से टूटकर गिरा और अमूमन ऐसा होता है कि जब इस तरीके का कोई बड़ा पेड़ उखड़ कर गिरता है तो आसपास की जमीन उखड़ जाती है लेकिन आप देख पाएंगे कि पीपलेश्वर महादेव का गर्भ ग्रह अपनी पुरानी स्थिति में ही खड़ा है। इसे चमत्कार से कम नहीं आंका जा सकता।
पेड़ के टूटने की सूचना जब स्थानीय निवासियों ने उदयपुर नगर निगम सहित पार्षद का चुनाव लड़ने वाले पारस सिंघवी को इस बारे में अवगत कराया तब नगर निगम से आए कुछ लोगों ने पीपल का पेड़ काटकर इसका अधिकांश हिस्सा कहीं और पहुंचा दिया और आधा पेड़ मंदिर प्रांगण में ही छोड़ कर चले गए। साथ ही मंदिर का मलबा भी मंदिर प्रांगण में डाल कर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान उदयपुर नगर निगम प्रशासन लापरवाही कर लौट गया। उदयपुर नगर निगम के लोगों को मंदिर की गरिमा और लोगों की आस्था का यह भी भान नहीं रहा कि मलबा मंदिर प्रांगण में ही डालना लोगों के गुस्से का कारण बन सकता है।
आज पीपलेश्वर महादेव का मंदिर स्मार्ट सिटी के काम और लापरवाही द्वारा टूटे जाने के बाद लगभग 8 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक उदयपुर नगर निगम सहित स्मार्ट सिटी के किसी अधिकारी ने पीपलेश्वर महादेव मंदिर के मरम्मत के बारे में नहीं सोचा और ना ही कोई अन्य अधिकारी या पार्षद इस मंदिर के जीर्णोद्धार के कार्य हेतु आगे आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द स्मार्ट सिटी उदयपुर और नगर निगम ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं करवाया तो जल्द नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा निकाला जाएगा।