मुगलों के 500 साल, असलियत जानेंगे तो हैरान हो जाएँगे
21 अप्रैल 1526.. पानीपत की पहली लड़ाई के लिए जाना जाता है. 500 साल हो गए. बाबर ने इब्राहीम लोधी को हराया और 4 साल बाद वो भी मर गया. 1707 में हुमायूँ, अकबर, जहांगीर, शाहजहाँ के बाद आया औरंगजेब भी मर गया. लगभग 170 साल का ये मुग़ल राज इस तरह से लोगों के दिमाग़ में अंदर तक कूट कूट कर भर दिया गया कि जावेद अख़्तर का दावा है कि हजारों साल से अलग अलग मत पंथों को मानने वाले, बसुधैव कुटुंबकम् का मूल मंत्र लेकर चलने वाले इस देश को सेक्युलरिज्म अकबर ने सिखलाया. संजय ख़ान ने मुगल म्यूजियम की योजना आगरा में परवान चढ़ा डाली. अमिताभ बच्चन एक मूवी में राही मासूम रजा का डायलॉग बोल रहे थे कि सारे हिल स्टेशन अंग्रेजों ने बसाए, बस कश्मीर मुगलों ने बसाया (कश्यप ऋषि स्वर्ग में कहीं हंस रहे होंगे). आशुतोष गोवारिकर ने ‘जोधा अकबर’ बनाकर अकबर को और महान बना दिया तो आज़ ये दौर आ गया है कि लोग औरंगजेब पर किताबें लिख रहे हैं, करण जौहर दो कदम आगे बढ़कर औरगज़ेब पर ‘तख्त’ बनाने लगे. हमने उनकी टीम को संदेश भिजवाया और लेख भी लिखे कि शाहजहाँ की जिस बेटी जहाँआरा का रोल करीना करने वाली है और टाइम्स ऑफ़ इंडिया जिसे चाँदनी चौक बसाने वाली कहकर गुणगान कर रहा है उसी ने कृष्ण जन्मभूमि की कान्हा जी की मूर्ति लाल क़िले की अपनी मस्जिद की सीढ़ियों पर चुनवा दी थी और ये कुत्ते उस पर पैर रखकर चढ़ते रहे. खैर फ़िल्म रुक गई.
सोचिए आशुतोष गोवारिकर उसके परदादा अकबर और दादी जोधा के साथ ‘मनमोहना’ गाना फ़िल्मा रहे थे. इसी अकबर के चलते चित्तौड़गढ़ के क़िले में हज़ारों राजपूतानियों ने जौहर किया था, कई हज़ार राजपूत अकबर ने मारे और फिर अकबर ने फ़तह नामा जारी किया कि उसका जन्म ही काफ़िरों के क़त्ल के लिए हुआ है. ख़ुद को गाजी घोषित किया. उसका पिता हुमायूँ इतना बड़ा अफ़ीमची था कि ऐलान कर दिया कि जितनी अफ़ीम की गोलियाँ बची हैं मैं उतने दिन ही ज़िंदा हूँ और आख़िरी गोली से पहले ही मार गया और आप पढ़ते आए हैं कि वो कितना वचन का पक्का था कि भिश्ती को एक दिन का बादशाह बना दिया था. रक्षा बंधन तक शुरू करने का क्रेडिट उसको दिया गया।
बचपन से हमें बताया जाता रहा है केवल तीन फ़िल्में डायमंड जुबली रही हैं, जिनमें एक मुग़ल ए आज़म है यानी सलीम और अनारकली की कहानी. हमने सच मान ली, जोधा की तरह. फिर 2023 में एक वेबसीरीज जी 5 पर आती है ‘ताज’. इस सीरीज से जनता को पता चलता है कि अकबर के एक बेटे मुराद की माँ तो अनारकली थी. यानी अनारकली सलीम की सौतेली माँ थी. इस मामले में मैं आगरा वालों का फैन हूँ, आज़म ख़ान जैसे बड़े नेता की हुकूमत के बावजूद घटिया आज़म ख़ान मोहल्ले का नाम नहीं बदला. जिस जगह काबुल भेजने से पहले बाबर की लाश रखने के लिए आराम बाग़ नाम का बगीचा बना था, उसका नाम ही ‘राम बाग’ कर दिया और अकबर के बारे में वहाँ एक कहानी मशहूर है कि कैसे एक हिंदू स्त्री के प्रेम में पड़कर रसिक तबीयत का अकबर जब वेश बदलकर उसके घर में घुसा तो लोगों ने जमकर पीटा और वो बता भी नहीं पाया कि अजीमुश्सान शहंशाह हम ही हैं.
आगरा के जिस मकबरे सिकंदरा में अकबर को दफ़नाया गया था, राजाराम जाट ने उसकी हड्डियों को निकालकर उन्हें आग के हवाले कर दिया था वो भी औरंगजेब में राज में. इसी औरंगज़ेब ने सिख गुरुओं और शिवाजी के बेटे को कैसे तड़पा तड़पा कर मारा था, लोग उसे भूल जायें इसलिए उसका साम्राज्य सबसे बड़ा था (जो था नहीं), टोपी सीकर गुजारा करता था जैसी कहानियाँ प्रचलित की गईं.
जिस जहांगीर को आप न्याय की जंजीर के लिए जानते हैं, वो खेतों में पिंजरे रखवा देता था ताकि उनमें अबोध गांव वालों को भरकर पर्थिया में गुलाम बनाकर भेज सके और बदले में घोड़े ले सके. लेकिन ये कोई पढ़ायेगा नहीं. प्रेम प्रतीक ताजमहल बनाने वाले शाहजहाँ की नंगी औरतों के साथ पेंटिंग भी आपको नहीं पढ़ाई जाती जबकि वो मुमताज़ की मौत के बाद उसने बनवाई थी. ना लोग ये बताते कि ताजमहल में जब पब्लिक का करोड़ों रुपया लग रहा था तब अकाल से हज़ारों भूखे मर गए थे और ना ये बतायेंगे कि कई मुगल राजाओं को बाजीराव पेशवा और महादजी सिंधिया अपने इशारों पर गद्दी पर बैठाते उठाते रहे थे. और ना ही ये बतायेंगे कि कितने मुगल राजा यमुना में मारकर लाल किले से फेंक दिए गए, कितने अंधे कर दिए गए. आज भी उनके वंशज भिखारियों की तरह घूमते हैं.
लेकिन एक तबका हमेशा से ही उन्हें महान बताता आया है. और इसकी क़ीमत हमारे तमाम महावीर राजाओं जैसे समुद्र गुप्त, रामराज चोल, कृष्ण देव राय आदि को गुमनामी में जाकर चुकानी पड़ी है।